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बुधवार, 23 सितंबर 2026

ECI में SIR को लेकर मतभेद, दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई औपचारिक आपत्तियां फिर भी नहीं हुई कोई कार्यवाही

    इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के काले कारनामों का खुलासा The Indian Express की रिपोर्ट में हुआ है। जिसमें SIR (special intensive revision) से जुड़े मामलों में 10 महीनों में 14 बार औपचारिक शिकायत की गई।

ECI की टीम के अंदर ही SIR को लेकर दो चुनाव आयुक्तों सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी के मतभेद ज्ञानेश कुमार  से है।  ज्ञानेश कुमार अपने मनमाने ढंग से SIR में वोटो जोड़ और काट रहे हैं। जिसको लेकर दो चुनाव आयुक्त सुखवीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई, लेकिन इसपर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ये  मामला देश के लोकतंत्र की जड़े हिलाकर रख दी हैं। लोगों का भरोसा कांस्टीट्यूशनल ऑथोरिटी पर है। जब इस ऑथोरिटी में बैठे लोग ही सही तरीके से काम नहीं करेंगे। तो सवाल उठना स्वाभाविक है। ये सवाल बेहद गंभीर हैं।

रिपोर्ट के अनुसार मतदाता सूची के प्रबंधन, नए वोटर्स के नाम जोड़ने और हटाने को लेकर और नए मतदाताओं के पंजीकरण प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। Form 6 को लेकर विशेष रूप से सवाल उठ रहा है। Form 6 इससे पहले SIR में नहीं था, इसमें नाना-नानी और दादा-दादी के नाम पूर्व SIR में होने को लेकर पूछा गया है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाताओं के डेटाबेस और चुनावी डेटा से जुड़े IT सिस्टम पर चिंता जताई है। इसी क्रम में गोवा में सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या सामने आई है। जिसमें 97 पात्र मतदाताओं और अधिकारियों को निर्णय करने में परेशानी सामने आई है। 

सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को सुनवाई में ECI से जवाब मांगा है। दिल्ली SIR में लॉजिकल डिस्क्रिंपेंसीज के चलते 30 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने ECI से स्पष्टीकरण मांगा और किस आधार पर नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि नोटिस देने से पहले कोई जांच और फिल्टर की जरूरत है। मतदाताओं को पता होना चाहिए किस कारण से मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है। उनके कौन से दस्तावेजों में क्या गलती है। 

रिपोर्ट सामने आने पर चुनाव आयोग का बयान सामने आया है ECI ने SIR को लेकर सामने आई आपत्तियों की रिपोर्ट पर कहा कि आंतरिक मतभेद या सुझाव निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। चुनाव आयोग ने कहा, ये सारी प्रक्रिया निर्धारित प्रोटोकॉल और ऑडिट नियंत्रण के तहत संचालित की गई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि, कुछ आंतरिक टिप्पणियों को लेकर अलग करके देखने पर उस कार्यप्रणाली की व्यापक जानकारी सामने नहीं आती है।

 जब चुनाव आयोग के कारनामों का खुलासा हुआ, उसके बाद से पूरा विपक्ष पूरी तरह से एक्टिव हो गया है। नेता विपक्ष राहुल गांधी का बयान सामने आया। जिसमें उन्होंने कहा जब सरकार बदलेगी तब ज्ञानेश कुमार का हिसाब होगा, एक तरह से चुनौती दे रहे हैं। ज्ञानेश कुमार वोट चोर है। नेताओं के अलग अलग बयान आ रहे है। इसके साथ ही लोगों के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते उनको SIR जैसे मामलों पर जागरूक रहना चाहिए। यह उनकी नागरिकता का सवाल है। जिसपर देश का लोकतंत्र खड़ा है।

चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार SIR के जरिए लाखों करोड़ों मतदाताओं को उनके अधिकार से बाहर कर रहे हैं। नोएडा में उनकी बेटी डिस्ट्रीक मैजेस्टिक मेधा रूपम जो लोग अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। उनके ऊपर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाकर गलत आरोपों में फंसा रही हैं। दोनों अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं।



मंगलवार, 22 सितंबर 2026

Bihar जिले के जमुई में नाबालिक लड़की के साथ, कुछ मनचलो ने किया छेड़छाड़ पुलिस ने किया गिरफ्तार , कुछ नेता इसे छोटी मोटी घटना बता रहे हैं जिस पर सियासी पारा चढ़ा

 

कुछ मनचलो ने किया नाबालिक लड़की के साथ बदसलूकी

 बिहार में 19 सितंबर को जमुई जिले में एक घटना सामने आई है। जिसमें कुछ मनचले लड़के नाबालिक लड़की के साथ बदसलूकी करते नजर आये।

बिहार में एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह घटना बिहार जिले के माडवा की है। जिसमें एक नाबालिक लड़की अपने दोस्त के साथ मड़वा पहाड़ी की ओर जा रहे थे। यह रास्ता सुनसान रहता है। जहां पर कुछ मनचलो ने लड़की के साथ उसके दोस्त को भी पीटा। जिसके बाद मनचलों ने लड़की के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी करते नजर आये। जिसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मामला सामने आया। जो एक बार फिर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।

मामला सामने आने पर पुलिस ने FIR दर्ज किया और एक SIT (Special Investigation Team)टीम का गठन किया। पुलिस के अनुसार SIT टीम का गठन SDPO दीप्ति मोनाली की अगुवाई में किया गया। जिसका उद्देश्य मामले की जांच करना, आरोपियों की पहचान करना और डिजिटल डेटा को सुरक्षित करना है। प्रारंभिक कार्यवाही में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद एक मुख्य आरोपी नंदन यादव और एक अन्य को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की मुठभेड़ में नंदन यादव के पैर में गोली लगी। जिसके बाद उसको हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। मुठभेड़ से जुड़े अन्य मामलों की जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार POCSO Act और BNS की धाराओं में FIR दर्ज किया गया है। POCSO Act का उद्देश्य बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों को रोकना है। ऐसे होने वाले अपराधों की कानूनी कार्यवाही के लिए विशेष प्रावधान उपलब्ध कराना है। इस मामले में जांच एजेंसियां वीडियो, और इससे जुड़े दूसरे साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।

ऐसे वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर भी      पुलिस उन सोशल अकाउंट के खिलाफ FIR दर्ज कर रही है। ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पीड़िता को अतिरिक्त मानहानि का नुकसान हो सकता है। उसकी पहचान सार्वजनिक हो सकती है। जिससे उसकी सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे वीडियो पोस्ट करने पर पुलिस कार्यवाही कर सकती है।

जेडीयू के उमेश कुशवाहा बिहार के प्रदेश अध्यक्ष हैं और  श्रावण कुमार बिहार सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री हैं। इसके बयानों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इनका कहना है ऐसी छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं। छिटपुट घटनाएं होती रही हैं। दुनिया अपराधों से मुक्त नहीं है। कभी कभार ऐसी घटनाएं होती रही हैं। जिसके बाद दोषियों को सजा देने की बात कही। बिहार की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने वीडियो दिखाए जा रहे हैं, जिसमें वो महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर बड़ी बड़ी बाते कर रहे हैं। लेकिन इसके उल्टा बिहार में मनचले एक नाबालिक लड़की के साथ बदसलूकी कर रहे हैं।

सोमवार, 21 सितंबर 2026

दिल्ली SIR जिसमें ECI ने वीवीआईपी लोगों को SIR जरिए भेजा नोटिस, क्या ECI इसके जरिए अपनी पारदर्शिता और निष्पक्षता को साबित रहा है

 

वीवीआईपी लोगों के नाम SIR जरिए भेजा गया नोटिस

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने कई वीवीआईपी के नामों को मतदाता सूची से बाहर किया। जिसमें देश की बड़ी हस्तियों के नाम शामिल हैं।

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान देश की बड़ी हस्तियों के नाम मतदाता सूची से बाहर कर उनको नोटिस भेजा है। जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण, पूर्व राष्ट्रपति जगदीप धनकड़, सांसद बासुरी स्वराज, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेशमंत्री जयशंकर प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, एडवोकेट कपिल सिब्बल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित कई और लोग शामिल हैं। इसमें से कई लोग बीजेपी और दूसरी पार्टियों के हैं जिनके नाम SIR में काटे गए हैं।

दिल्ली में 2002 के SIR और मौजूदा सूची के अनुसार करीब 1.45 करोड़ वोटर्स थे। घर घर जाकर फॉर्म भरवाया गया था। इसमें से 97.7 लाख मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त किए गए हैं और उनको डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित किया गया है।जिसमें से 47.7 लाख तक वोटर्स के नाम काटे गए हैं। 33 लाख मतदाताओं के फॉर्म में गड़बड़ियों को लेकर नोटिस भेजा गया है। जिसमें नाम, पता और बेसिक जानकारी में गड़बड़ी पाई गई है। 

ECI एक अलग फॉर्मेट में SIR कर रहा है। जिसमें देश के वीवीआईपी लोगों को SIR के चलते गड़बड़ियों को लेकर नोटिस भेजा रहा है। जिसमें कुछ देश के बड़े लोग शामिल हैं। इन लोगों के नाम तो आसानी जुड़ जायेंगे, लेकिन उन 33 लाख मतदाताओं का क्या होगा। क्या वो समय पर अपना जुड़वां पाएंगे और समय पर आवश्यक दस्तावेज दे पाएंगे। क्या ये लोकतंत्र का मजाक उड़ाया जा रहा है। 

ECI को नहीं पता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, विदेशमंत्री जयशंकर प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और अन्य वीवीआईपी लोग कौन हैं। इन सबका नाम मतदाता सूची में न होने के बावजूद ये लोग चुनाव कैसे लड़े और देश के संवेदनशील पदों पर पहुंच गए। क्या इन वीवीआईपी नमो के पीछे कोई राजनीत हो रही है। ECI इन नामों को दिखाकर अपनी जिम्मेदारी और पारदर्शिता दिखा रहा है। इसके पीछे लाखों करोड़ों मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के जरिए कटा जा रहा है।

जिन 33 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है, उनमें से 14 लाख मतदाताओं का डेटा 2002 के SIR से लिंक नहीं किया जा सका है। जिसके लिए आवश्यक दस्तावेजों को मांग गया है। जिसमें जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, जाति प्रमाण पत्र और स्थानीय निवास प्रमाण पत्र है। जो मतदान करने के पात्र हैं वो लोगों 30 सितंबर तक फॉर्म 6 के माध्यम से अपना नाम दुबारा आवश्यक दस्तावेजों के साथ दर्ज करवा सकते हैं।

दिल्ली में SIR की पारदर्शिता से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। Indian express की रिपोर्ट के अनुसार 22 सितंबर को इसकी सुनवाई है। 33 लाख याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि, मतदाताओं को नोटिस जारी करने का कारण सार्वजनिक किया जाय। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि लॉजिकल गलतियों और अन मैपिंग के आधार पर किस तरह मतदाताओं को जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। ECI का कहना है मौजूदा रिकॉर्ड की जांच और जानकारी सटीक बनाना है।



रविवार, 20 सितंबर 2026

Chatron ki goonj कार्यक्रम राहुल गांधी का एक मिशन, छात्रों का मंच

 

दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव

छात्राें की गूंज का कार्यक्रम राहुल गांधी का एक बड़ा मिशन है। जो लगातार चल रहा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी इस मंच पर छात्रों से सीधा संपर्क करते हैं। उनकी समस्यों को उठाते और सुनते हैं। 

छात्रों की गूंज कार्यक्रम की शुरूवात 17 जून 2026 राजस्थान कोटा से हुई है। जिसका उद्देश्य छात्रों से मिलना, उनकी समस्यों को सुनना और उनकी आवाज को उठाना था। इस कार्यक्रम में छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम के जरिए हजारों लाखों छात्र राहुल गांधी से जुड़े। शुरुवाती दौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम बहुत प्रभावी नहीं रहा, लेकिन बाद में धीरे धीरे छात्र इस कार्यक्रम से जुड़ने लगे। कार्यक्रम को पूरे देश के छात्रों तक पहुंचाना है और इसी क्रम में राहुल गांधी एक के बाद एक कार्यक्रम कर रहे हैं। राहुल गांधी लगातार छात्रों और उनके परिवारों से मिल रहे हैं। चाहे इंदौर हो या पुणे देश के अलग अलग राज्यों में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। देश हो या देश के बाहर छात्रों से मिल रहे हैं।

इससे पहले मैने नहीं देखा था कि राहुल गांधी इतना  कभी एक्टिव रहे हो।  राहुल गांधी इस कार्यक्रम में सरकार की नाकामियों की पोल खोल रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य या देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लगातार एक्टिव हैं। छात्र उनके पास अपनी परेशानियों को लेकर जाते हैं। नीट पेपर लीक, इकॉनमी और मेडिकल सेक्टर जैसे दूसरे क्षेत्रों में सवाल उठा रहे हैं। इस कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी बीजेपी पर लगातार हमलावर रहते हैं। बीजेपी की तरफ से लगातार राहुल गांधी के कार्यक्रमों का विरोध किया जा रहा है।

क्या राहुल गांधी इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं के दिल में अपनी जगह बना पाएंगे। दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव हारने के बाद चारों तरफ से सवालों से घिर गए हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी संगठन ने 4 में से 3 केंद्रीय पद जीते, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार दीपांश शौकीन ने जीता।NSUI का एक भी कैंडिडेट कोई चुनाव नहीं जीता। इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा दीपांश शौकीन की हो रही है क्योंकि इससे पहले दीपांश शौकीन NSUI से जुड़े थे। क्या कन्हैया कुमार और कांग्रेस को पता नहीं था। जब कांग्रेस के पास ऐसे उम्मीदवार थे तो दूसरे को टिकट देने की क्या जरूरत थी। 

राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम तो लगातार कर रहे हैं। क्या वो इन कार्यक्रमों के जरिए जमीनी स्तर पर पकड़ बना पा रहे  हैं। चुनाव में हार के बाद कही न कही कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। इस चुनाव को नजरंदाज भी नहीं किया जा सकता है। इस चुनाव से देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 

हालांकि राहुल गांधी इस समय काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं और सरकार के लिए लगातार मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। बीजेपी की तरफ से लगातार उनपर प्रहार किया जा रहा है, लेकिन राहुल गांधी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकार पर दबाव बना रहे हैं, जिससे कई जगह पर उनको कामयाबी भी मिली है। 





बुधवार, 16 सितंबर 2026

UPI transection पर हर किसी को नहीं लगेगा charge ! जानिए किन लोगों को मिलेगी छूट

   

हर किसी को नहीं देना होगा चार्ज

 UPI से ट्रांजेक्शन करने पर अब चार्ज लगेगा। किसको लगेगा और किसे छूट मिलेगी ? मर्चेट और MDR पर क्या असर पड़ेगा। क्या सरकार इसको टैक्स के रूप में वसूलेगी। 15 अक्टूबर से नया नियम लागू होगा।

UPI से 2,000 से ज्यादा का भुगतान करने पर 0.4 % का चार्ज लगेगा। इस भुगतान का पैसा आम ग्राहकों को नहीं देना होगा, ऐसा सरकार का कहना है। UPI से 2,000 का भुगतान करने पर इस रूपये का चार्ज मर्चेंट को देना होगा। मर्चेट डिस्काउंट रेट (MDR) यह सभी मर्चेंटो को नहीं देना होगा। कैटेगरी के आधार पर बांटा गया है और चार्ज केटेगरी के अनुसार हो सकता है।

MDR क्या है, मर्चेट डिस्काउंट रेट वह रेट है जो भुगतान करने पर इसे मर्चेंट के स्तर पर लगाया जाता है। (NPCI) national payment council of India के द्वारा साफ किया गया है जो कुछ बड़े मूल्य वाले मर्चेंटो पर लगाया जा रहा है। 2,000 से कम भुगतान करने पर शून्य चार्ज रहेगा। इससे ज्यादा का भुगतान करने पर 0.4% के हिसाब से चार्ज लगेगा। यह चार्ज छोटे मर्चेंट, परिवार, दोस्तो को भुगतान करने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। छोटे मर्चेंट P2PM 1 लाख तक monthly QR receipt पर जीरो MDR।

NPCI के अनुसार 2,000 से ऊपर भुगतान करने पर 0.4 % से चार्ज लगेगा। उदाहरण के लिए 3,000 का भुगतान करने पर 12 रूपये का चार्ज लगेगा। इसी तरह 5,0000 का भुगतान करने पर 200 रूपये का चार्ज लगेगा।

रेलवे जैसे सार्वजनिक स्थानों पर या पब्लिक सर्विसेज पर MDR flate ₹5 रूपये रखा गया  है। इसमें 2,000 से ज्यादा  राशि चाहे 25,000 या 5,0000 हो ₹5 से ज्यादा नहीं देना होगा। वित्त वर्ष 2025–26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) में भारत में UPI का इस्तेमाल बहुत बड़े स्तर पर हुआ।

कुल UPI transactions: करीब 24,162 करोड़

यानी लगभग 241.6 अरब transactions

कुल transaction value: करीब ₹314 लाख करोड़

औसतन प्रतिदिन लगभग 66 करोड़ UPI transactions हुए।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि जो मर्चेंट वाला है वो इस पैसे को कही से भी मैनेज करेगा या सर्विस कॉस्ट बढ़ाएगा। ये चार्ज किसी न किसी तरह से आम लोगों को ही प्रभावित करेगा और आखिरी में इंडिरेक्ट रूप में ग्राहकों की पॉकेट से कटेगा। 

इसका क्या कारण है कि सरकार को UPI transection पर चार्ज लगाना पड़ रहा है।क्या सरकार ने जो पैसा बड़े उद्योगपतियों का माफ किया है उसकी भरपाई के लिए इस पैसे को UPI transection पर चार्ज लगाकर पूरा किया जाएगा।

सोमवार, 14 सितंबर 2026

2030 तक AI इंसानों को खत्म कर सकता है? Antropic और Open AI के पूर्व रिसर्चर Jacob Coxon की चेतावनी से मचा हड़कंप

 

Open AI और Anthropic के पूर्व रिसर्चर के बयान से मचा हड़कंप

 Open AI और Anthropic जैसी कंपनियों में काम कर चुके पूर्व रिसर्चर Jacob Coxon ने आरोप लगाया है। Self-improving और superintelligece बनने के रेश में कई देश लगे हैं। एंथ्रोपिक के और मौजूदा शोधकर्ता ने भी अगले दशक में मानव विकाश का जोखिम 10% अधिक बताया है।

हाल में ही छपी The Gaurdian की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौका दिया है। USA में sanfrancisco और कैलिफ़ोर्निया में Open AI और Anthropic जैसी कंपनियों काम कर चुके पूर्व रिसर्चर Jacob Coxon ने चेतावनी दी है कि 2030 तक AI इंसानों को खत्म कर सकता है। रिसर्चर Jacob Coxon ने Open AI और Anthropic कंपनियों में बतौर प्रीट्रेनर रिसर्चर के तौर 3 साल काम किया है। सितंबर 2026 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि कंपनियां सेल्फ इंप्रूवमेंट और सुपरिंटेलीजेंस बनने की रेश में आगे दौड़ रही हैं। दुनिया का हर देश इस रेश में आगे होना चाहता है और सुपरिंटेलीजेंस बनना चाहता है। लेकिन इसके नियंत्रण के बारे में कोई सोच नहीं रहा है।

उनकी चिंता है कि कही भविष्य में AI के objectives को मानव मूल्यों और हितों के साथ सुरक्षित रूप से align करना।जिससे AI अपने आप सिस्टम को कंट्रोल न कर सके। AI इंसानों से ज्यादा ताकतवर न बन जाए और इंसानों की बातों को मानने इनकार कर दे। इंसानों और AI में मतभेद हो जाए और AI अनकंट्रोल हो जाए, जिससे इंसानों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। AI डेवलपमेंट से लेकर अब तक इस विषय वैज्ञानिकों और रिसर्चर कि चिंता रही है। समय समय पर इसपर लेख और आर्टिकल छपते रहे हैं। इसके साथ ही हॉलिवुड में इस पर सुपरकंप्यूटर और टर्मिनेटर जैसी AI के अनकंट्रोल होने पर मूवीज बन चुकी हैं। जिसमें AI के अनकंट्रोल होने की स्टोरी दिखाई गई है।

AI डेटा के आधार पर कार्य करता है और AI इतना डेटा स्टोर कर लिया है कि इंसानों की जरूरतों को समझने लगा है। धीरे धीरे इंसानों के दिमाग पर काबू  पा रहा है। इस समय लगभग सारे काम AI से हो रहे हैं। AI ने जहां एक तरफ कार्य करने में सहायता कर रहा है और समय बचा रहा है। तो दूसरी तरफ इसपर नई बहस छिड़ गई है। उससे ज्यादा कही इसका गलत प्रयोग पर बहस चल रही है। हमे ये नहीं भूलना चाहिए ,कोविड के समय चीन के लैब से कोरोना वायरस निकला था। जिसने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी थी। 

AI की बड़ी कंपनियां ह्यूमनरॉइड रोबोट्स बना रही हैं। जो लगभग इंसानों जैसे ही देखेंगे। उनको इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि खुद से बोर्डर पर लड़ सके और कंपनियों में काम कर सके। AI इतना नेचुरल रिसोर्सेज को खा रही हैं जिसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ेगा। आज के समय में लोग  सोते जागते AI का प्रयोग कर रहें हैं। AI अपना पूरा इकोसिस्टम बना लिया जिसके जरिए इंसानों की सोच को बदल रहा है। आने वाले समय में AI अपनी पकड़ और मजबूत कर सकता है। यदि ये सब ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब AI का पूरा नियंत्रण हाेगा।


रविवार, 13 सितंबर 2026

पैकेट पर लाल रंग का निशान बताएगा कितना खतरनाक है खाना? सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से मांगा जवाब

 

फूड पैकेट पर वार्निंग लेबल लगाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाद्य पदार्थों में ज्यादा चीनी, वसा और नमक को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और FSSAI से जवाब मांगा है। Front of pack labeling (FoPL) करने का आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में 10सितंबर 2026 को 3S और our health Society बनाम Union of India का मामला दायर किया गया। जिसकी सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट FSSAI से 10 दिन के अंदर जवाब मांगा है। फूड पैकेट पर पैकेट के आकार के अनुसार वार्निंग लेबल रेड कलर का लगाया जाएगा। वार्निंग लेबल का आकार 6 कोणीय और उसका साइज सब कुछ निर्धारित करना होगा। उसमें कौन सा इंग्रीडिएंट है और उसकी मात्रा कितनी है? पैकेट के टेक्स्ट के फॉन्ट से वार्निंग लेबल का फॉन्ट बड़ा होगा। वार्निंग लेबल फूड पैकेट के फ्रंट पर लगेगा। 

इससे ग्राहकों समझने और पढ़ने में आसानी होगी। उपभोक्ता को आसानी से पता चलेगा कि कौन सा इंग्रीडिएंट कम या ज्यादा है। लोग अपनी इच्छा अनुसार निर्णय ले सकेंगे कौन प्रोडक्ट लेना है या नहीं। इन जंक फूड्स में वसा, शुगर और चीनी मात्रा ज्यादा अलग अलग खाद्य पदार्थों के अनुसार होती है। जंक फूड्स और कोल्ड्रिंक्स जैसे पेय पदार्थों में नेचुरल सुगर के साथ अलग से सुगर मिलाया जाता है। जो स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर fssai ने इस पर समय मांगा है और इसको दो चरणों में लागू करने को कहा है। इसमें कंपनियों को बदलाव करने पर समय लग सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस पर 10 दिन के अंदर जवाब मांगा है। वार्निंग , बैकग्राउंड, इंग्रीडिएंट मात्रा सबकुछ निर्धारित करना होगा। क्या वार्निंग लेबल लगाने से लोग जंक फूड्स और कोल्ड्रिंक्स पीना कम कर सकते हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम खासकर बच्चों के लिए उठाया है क्योंकि इन जंक फूड्स का बुरा प्रभाव सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ता है। इन जंक फूड्स के खाने से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं। इन जंक फूड्स में वसा, शुगर और नमक की मात्रा बॉडी की जरूरत से ज्यादा होती है। क्यों ये कपनियां सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं करती हैं और उनको लेबल लगाने की जरूरत पड़ रही है। 




ECI में SIR को लेकर मतभेद, दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई औपचारिक आपत्तियां फिर भी नहीं हुई कोई कार्यवाही

    इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के काले कारनामों का खुलासा The Indian Express की रिपोर्ट में हुआ है। जिसमें SIR (special intensive revisio...